नक्सलवाद
आखिर ये शब्द है क्या , और उत्पत्ति इसकी कहाँ से हुई , और किस चीज को परिभाषित करने के लिए हुई ? आधा भारत इस शब्द से पीड़ित दिख रहा है। क्या ये वास्तव मे इतनी खतरनाक है। दरअसल , नक्सलवाद एक मानसिक अवस्था है , जो कहीं ना कहीं हर एक मन के भीतर में छुपी हुई है। जिनको नक्सलवाद का एक सदस्य मानते हैं वो भी हमारे समाज से निकले हुए हैं। आखिर उनको जरूरत क्यूँ पड़ी आम जीवन से हट कर , छुपकर नक्सलवाद की पनाह लेने की ? डर है कहीं ऐसा समय ना आ जाए की हम सब नक्सल बन जाएँ। प्रशासन की तमाम कोशिशें होती हैं उन्हे उन्मूलित करने के लिए , पर क्या उनका सफाया ही एक मात्र हल है। आखिर क्यूँ इतने प्रयासों के बावजूद उनके पाँव मजबूत और अधिकार क्षेत्र असीमित होता जा रहा है। क्या मुख्यधारा धारा से उनका जुड़ पाना इतना कठिन है.उनकी दुश्मनी आमलोगों से नहीं बल्कि प्रशासन तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं से है। पर क्यूँ ? दरअसल बात स्पष्ट है की वे नक्सली खुद नहीं बने हैं बल्कि मजबूर होकर बना दिये गए हैं। हक की बात है , जो या तो उनको दी नहीं गयी या फिर उनसे जबर्दस्ती छीन ली गयी। औद्योगिक तरक्की के लिए समाज...