इंसान
आज हर कोई परेशान सा क्यूँ है ?
आज हर कोई हैरान सा क्यूँ है ?
जाने सुकून को ढूँढता सा क्यूँ है ?
आज हर एक इंसान अंजान सा क्यूँ हैं ?
चेहरे आज सबके डूबे से क्यूँ हैं ?
पलकें आज सबकी नम सी क्यूँ हैं ?
खामोशियान ही जाने जवाब देती क्यूँ है ?
आज हर एक इंसान अंजान सा क्यूँ हैं ?
पहले सा ना जाने भगवान नहीं क्यूँ है ?
लकीर चिंताओं की मिटती नहीं क्यूँ हैं ?
शिकन ना जाने खत्म होती नहीं क्यूँ हैं?
आज हर एक इंसान अंजान सा क्यूँ हैं ?
कलियाँ आज फूल बनती नहीं क्यूँ हैं?
गलियाँ आज सिमटती सी क्यूँ हैं ?
दिलों में घर कर जाना इतना मुश्किल क्यूँ है ?
आज हर एक इंसान अंजान सा क्यूँ हैं ?
फासले आज दिलों की बढ़ाते दूरियाँ क्यूँ हैं ?
हर एक जर्रा ना जाने आज मुरझाया सा क्यूँ है ?
ना जाने आज शहर में हर इंसान अंजान सा क्यूँ है ?
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