कोई है... कोई है जो आपको निःशब्द करना चाहता है, आपकी आवाज़ को दीवारों में कैद कर देना चाहता है, हाँ… वही है, जो इस खामोशी की तैयारी भी बड़े सलीके से कर रहा है। कोई है जो हर पल आपको डर के साये में रखना चाहता है, आपके आत्मविश्वास को धीरे-धीरे खींच लेना चाहता है, हाँ… वो हर रात, हर सुबह, आपको डराने का नया बहाना ढूँढ रहा है। कोई है जो आपको भीड़ का एक साधारण हिस्सा बनाना चाहता है, जहाँ न आपकी पहचान हो, न सवाल, न आवाज़, हाँ… वो इस कोशिश में, एक-एक कर आपकी खासियत मिटाता जा रहा है। कोई है जो आपको सच से कोसों दूर रखना चाहता है, आपकी आँखों पर परत-दर-परत झूठ की धुंध चढ़ा रहा है, हाँ… वो बहुत हद तक सफल भी हो गया है, सच की चिंगारी को राख में बदलते हुए। कोई है जो नहीं चाहता कि आप तालीम की रोशनी तक पहुँचें, जो नहीं चाहता कि किताबें आपकी सोच को तेज करें, हाँ… वह हर रोज एक पन्ने फाड़ रहा है, ताकि आपकी समझ किसी को चुभ न जाए। कोई है जो आपकी मुस्कराहट तक को नियंत्रित करना चाहता है, आपके सपनों के आकार तक को छोटे दायरे में बाँध...
With the
disappearance of the Legend “Bala Saheb Thackrey" there will be a certain
gap in the mainstream of the Indian Politics, Indian Philanthropy, Indian
Cartoonist, and a Great Iconic figure. For the inspiration of many in almost
every field, he was always been a role model. He taught to rise, make you an
icon, and be fearless. Always lead what you have achieved. Be stuck to what you
think is right and follow your conscience had been his anecdote. Moreover his teachings
were directly concerned with the fighting instincts for your rights. He taught
us not to surrender in front of evils. The way he developed an entrepreneurial
skill set is really an inspiration for many young colts.
The real fighter is
no more among us but the teachings will always inspire us to do betterment of
the society. He fought for the rights of the Marathi men. He never assumed
himself the supreme of the party and never coveted himself by any prestigious
post. Brave yet simple, was his quality. With the demise, the air simply got
moist and atmosphere upset.
People thronged
from all over to see their most beloved for the last time. All eyes were wet.
Some cried and some got numb. Everyone was pinching themselves to make the last
truth the biggest lie. The lacuna after his departure will rarely be filled.
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“धर्मेंद्र नहीं रहे!” — और फिर जो हुआ… 12 नवंबर 2025, दोपहर 1 :43 pm से 3:30 बजे तक की सच्चाई "धर्मेंद्र जी जीवित हैं, स्वस्थ हो रहे हैं, और उनका परिवार उनके स्वास्थ्य पर नियमित जानकारी दे रहा है।" लेकिन कुछ घंटे पहले, सोशल मीडिया पर यह “ख़बर” आग की तरह फैली — “The great legend Dharmendra is no more.” और फिर, जैसे किसी ने बटन दबा दिया हो, बड़े-बड़े न्यूज़ चैनल, खुद को खोजी पत्रकार कहने वाले यूट्यूबर्स, फेसबुक-इंस्टा के महारथी, और स्टेटस लगाने वाले हर उम्र के लोग — बच्चे, जवान, अधेड़, बूढ़े, महिला, पुरुष — सब एक साथ सक्रिय हो गए। किसी ने सत्यापन नहीं किया। किसी ने परिवार से नहीं पूछा। बस “Breaking News” का मोह इतना गहरा था कि “सच की तह तक जाने” की जरूरत किसी को महसूस ही नहीं हुई। यही तो आज के सोशल मीडिया युग की सच्चाई है — सूचना नहीं, सबसे पहले सूचना देने की होड़। “मृत्यु अटल है, पर अफवाहें उससे भी तेज़” मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है। उसे टाला जा सकता है, नकारा नहीं जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि जब किसी की मौत तय समय से पहले “घोषित” कर दी जाती है, तो यह जल्दबाज़ी आखिर किसलिए...
कुछ मौतें आई दूर किसी शहर में, और कुछ मारे गए दिल्ली में। कुछ के धर्म देखे गए , कुछ की जातियाँ पूछी गई। इंसान वो भी जो थे जो मरे वहाँ , और वो भी जो गुजर गए दिल्ली में । अब बताइए किसकी मौत बेहतर? या किसकी मौत बदतर ? या दानों ही बदतर या दोनों ही बेहतर ? या कुछ कम बेहतर या कुछ कम बदतर ? आखिर इतना आसान क्यों है हमारा मार दिया जाना ? बस एक पल में , बस एक क्षण में, या बस यूं ही? मौत आम आदमी मरता है, कोई हर रोज, कोई एक पल में ही । फिर भी जिंदा रह जाते है बस उनके ही घरवाले । देश फिर भी चलता रहता है, लगातार, बिना रुके बिना थके। फिर हम हर दिन क्यों जलते, दफन होते रहते है। जिंदा रहने का हक हमसे हर दिन हर पल हर क्षण कौन छीन रहा है? क्यों अपनी मौत पर सवाल करें किसी से ? क्यों जिंदा रहने पर मलाल करें किसी से ? किसको पड़ी है कौन मारा गया? कौन बच गया? किसकी मौत पर मनाएँ मातम ? किसकी मौत पर जलाएं दीये ? क्या महज एक आँकड़े है हम एक देश के लिए। जब तक सवाल नहीं करेंगे अपने अस्तित्व का, हम आँकड़े ही रहेंगे सरकार का , जिंदगी किसी की खैरात नहीं है ...
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